Motivational Story In Hindi सफलता से कुछ कदम पहले

motivational story in hindi for success

Motivational Story In Hindi For Success – बहुत समय पहले आर यू डार्वि नामक व्यक्ति जो कि गोल्ड रस के दिनों में ‘स्वर्ण बुखार’ से ग्रस्त हो गए थे। उन दिनों पश्चिमी क्षेत्र में जमीन में सोने की खान लगी हुई थी। और सोने की खान पर कब्जा करना उनकी लालसा थी। उन्होंने यह कभी नहीं सुना था कि पृथ्वी से निकाले गए सोने की तुलना में एक बुद्धिजीवी व्यक्ति की दिमाग से सोने की खदान की जा सकती है। उन्होंने कुदाल और फावड़ा  लेकर सोने की खनन करने पश्चिमी क्षेत्र में निकल  गए।  जाना कठिन था लेकिन सोने को हासिल करना उनकी दृढ़ लालसा। 

कई महीनों के मेहनत के बाद सोने की खान का पता चला। सोने को जमीन से बाहर लाने के लिए भारी मशीनों की जरूरत थी, उन्होंने सोने की खान को पतझड़ों से ढक दिया और वापस अपने घर को चले।  घर आकर सोने की बारे में अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों को बताया। रिश्तेदारी और पड़ोसियों की मदद से पैसे इकट्ठे कर कुछ मशीन को खरीदा और वापस सोने की खनन के लिए चल दिए।

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खुदाई शुरू की खुदाई के दौरान सोने की कुछ टुकड़े  मिले। हौसला बुलंद होते चला और खुदाई गहरी करते चले गए। खुदाई के साथ-साथ सोने की खान गायब होती चली गई। वे खुदाई के अंत छोर तक पहुंच गया। लेकिन सोने की खान हाथ ना लगे अंत में हताश होकर बेशुद्ध गिर पड़े। और गुस्से में आकर खरीदे गए मशीन को एक कबाड़ी के हाथ बेच कर वापस घर चल दिए। Motivational Story जिद्दी बनो

कबाड़ी वाला चालाक और बुद्धिमान था। उसने खुदाई के बारे में पता लगाया, और अंधाधुंध खुदाई शुरू ना करके किसी भौगोलिक बुद्धिजीवी को बुलाकर राय मशवरा लेना उचित समझा। बुद्धिजीवी व्यक्ति ने उस जगह की गणना की और बताया कि, खुदाई जहां समाप्त हुई है, वहां से महज 2 फुट दूर सोने की खान स्थित है। ये जानने के बाद कबाड़ी द्वारा खुदाई को प्रारंभ किया गया। खुदाई करने पर सोने की खान वहीं मौजूद थे, जहां पर भौगोलिक बुद्धिजीवी व्यक्ति ने गणना की थी। कबाड़ी ने थोड़ा होशियारी दिखाकर करोड़ों रुपए की सोने की खान को हासिल किया। 

वही आर यू डार्वि रिश्तेदारों और पड़ोसियों के कर्ज में दबकर डूबते चले गए। कबाड़ी प्रारंभ किए गए कार्य से हार मानने के पहले  किसी विशेषज्ञ व्यक्ति से सलाह लेना उचित समझता था।और विशेषज्ञ की राय लेकर करोड़ों सोने की खान पर कब्जा जमाया। जो कि आर यू डार्वी के अंदर नहीं था।

अंततः किसी भी कार्य के लिए प्रयासरथ और कर्म करने के साथ-साथ अपने सीनियर या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। और साथ ही किसी भी व्यक्ति  के जीवन में सफलता आने से पहले उसे अस्थाई असफलता नामक शब्द से पराजय मिलना तय है। और जब इस दौरान असफलता नामक शब्द से भेंट होती है, तो अधिकतर व्यक्ति के लिए सबसे आसान रास्ता उस कार्य को छोड़ देना होता है, जोकि अपने आप से समझौता करना या उस लक्ष्य से हार जाना माना जाता है। 

इन दिनों लगभग प्रत्येक व्यक्ति के पास चाहे वह व्यापारी हो या नौकरी पेशा व्यक्ति या स्टूडेंट हर किसी के जीवन में अपना कुछ ना कुछ लक्ष्य बना रहता है।  और उस लक्ष्य को पाने के लिए सभी व्यक्ति प्रयासरथ रहते है। लेकिन फिर भी प्रयासरथ रहने के साथ-साथ कहीं ना कहीं उनके मन में यह डर बना रहता है कि क्या मैं इस कार्य में सफल हो पाऊंगा ? क्या मैं उस कामयाबी की ऊंचाई तक पहुंच पाऊंगा ? जो कि मेरा सपना है। जिसके लिए मैं इतना प्रयासरथ हूं। 

इस प्रकार की सोच से व्यक्ति अपने आप पर एक डर हावी कर लेता है, जिसका नाम होता है विफलता। और विफलता के सबसे सामान्य कारणों में सफलता से कुछ कदम पहले आने वाली अस्थाई हार द्वारा पैदा होने वाले कुछ परेशानी या अड़चनें आने के कारण व्यक्ति अपने उस लक्ष्य से पीछे भागने लगता है। जिस लक्ष्य को पाने के लिए अभी तक प्रयासरथ था। और लगभग 90% लोग इस अस्थाई हार  से प्रभावित होकर अपने लक्ष्य तक पहुंचने के कुछ ही कदम पहले अपने आप से समझौता कर लेते हैं, या भाग खड़े होते हैं।  जोकि यह अस्थाई हार प्रत्येक सफलता के कुछ कदम पहले आने स्वभाविक हैं।  क्योंकि सफलता नामक शब्द आपको मिलने से पहले अपने भाई विफलता को आपको डराने के लिए कि आप उस सफलता के लायक है भी या नहीं अवश्य भेजता है। जैसा कि आर यू डार्वि के साथ हुआ। 

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