Moral stories in Hindi for Class 9 गरीब छात्र

 Moral stories in Hindi for Class 9

Moral stories in Hindi for Class 9 –  उदयपुर नामक गांव में दो विद्यार्थी रहते थे। विपुल और शुभम। वे दोनों कक्षा 9 में पढ़ते थे। विपुल एक गरीब किसान का लड़का था, और शुभम उस गांव के सबसे धनि आदमी का लड़का था। उस गांव में कोई स्कूल ना होने के कारण वे दोनों एक साथ बाहर के गांव में पढ़ने जाते थे। विपुल के पिता महेश लकवा से ग्रस्त थे। उनके पूरे शरीर में लकवा मार देने से वह कोई काम नहीं कर पाते थे, और हमेशा बिस्तर पर पड़े रहते थे।

विपुल की मां उर्मिला बहुत ही मेहनती थी। वह दिनभर खेतों में काम मजदूरी कर घर परिवार का खर्चा चलाती थी।और अपने पति का इलाज कराने के लिए एक-एक पैसा इकट्ठा करती थी। एक दिन उर्मिला शाम को खेतों से काम कर लौटने के बाद अपने परिवार के साथ बैठकर भोजन कर रही थी, उसने अपने पुत्र विपुल से बोला – बेटा हम लोग बहुत गरीब हैं तुम्हारे पिता की हालत ऐसी ही है, मैं पूरे दिन मेहनत मजदूरी करती हूं की तुम पढ़ लिखकर कुछ बन जाओगे तो हमारी गरीबी दूर हो जाएगी। बेटा तुम खूब मन लगाकर पढ़ना और एक दिन बड़ा आदमी बनना और हमारी गरीबी को दूर करना।

 Moral stories in Hindi for Class 9

यह सुन विपुल बोला – मां आप चिंता मत करो मैं खूब मन लगाकर पढूंगा। विपुल खूब मन लगाकर पढ़ने लगा। वह प्रतिदिन स्कूल जाता था। उसका मित्र शुभम अमीर होने के साथ-साथ घमंडी भी था। उसे अपने धन पर घमंड रहता था। वह हमेशा विपुल को अपने से नीचा दिखाता था लेकिन विपुल को इस बात का जरा भी प्रभाव नहीं पड़ता था। वह अपने पढ़ाई में मस्त रहता था। स्कूल से घर आने के बाद अपने मां के साथ खेतों में काम में भी हाथ बटाता था।

उसकी मां खेतों से सब्जियां तोड़ कर लाती और विपुल माँ के साथ बाजार में सब्जियां बेचकर शाम को वापस घर आ जाता। सुबह उठकर और उर्मिला अपने भैंस से दूध निकालती और विपुल दुकानों पर दूध को बेच आता था। और घर आकर नहा धोकर वह स्कूल और उर्मिला अपने काम पर चली जाती। गरीबी के कारण वह स्कूल में अक्सर रोटी और अचार लेकर जाता था। यह देख कर शुभम उसका मजाक उड़ाता। लेकिन फिर भी विपुल कहता मेरे मां बाप तुम्हारे मां बाप जैसे अमीर नहीं है, मैं एक दिन पढ़ लिख कर अमीर आदमी बनूंगा और फिर तुम्हारे जैसे खाना खाऊंगा और फिर अपने काम में लग जाता।

एक दिन स्कूल में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा होने की घोषणा हुई। उस परीक्षा को पास करने के लिए विपुल खूब मन लगाकर पढता था और परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया। स्कूल में प्रथम स्थान लाने पर विपुल की चारों तरफ बाह – वही  होने लगी सारे बच्चे विपुल को शराहने लगे। यह देख शुभम बहुत जलता था। स्कूल के तरफ से विपुल को इनाम के तौर पर कुछ पैसे दिया गया। विपुल बहुत खुश था। उस पैसे से विपुल के पिता का इलाज हुआ और वो ठीक हो गये।

विपुल के माता – पिता अपने बेटे के पहले कामयाबी पर फूले नहीं समा रहे थे। एक दिन स्कूल के प्रधानाचार्य विपुल के घर गए और बोला उर्मिला बहन आपका बेटा बहुत होनहार छात्र है उसको खूब पढाईगा। यह सुन उसके मां-बाप ने बोला प्रधानाचार्य जी आप सही कह रहे हैं लेकिन हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि हम आगे पढ़ा सकें। इस पर प्रधानाचार्य ने कहा विपुल भविष्य का सूरज है, इसकी पढ़ाई लिखाई मैं पूरा करवाउंगा। सच्चे मित्र की धोखेबाजी

दोनों बहुत खुश होते हैं। अगले साल हाई स्कूल की परीक्षा में विपुल अपने स्कूल में टॉप करता है और पूरे जिले में नाम रोशन करता है। वही शुभम घमंडी स्वभाव होने के कारण कुछ नहीं कर पाता और अपनी गलती पर पछतावा करता है और विपुल से माफी मांगता है। विपुल का नामांकन एक केंद्रीय विद्यालय में हो जाता है। और वह सरकार के खर्चे पर बाहर पढ़ने चला जाता है।

 

दोस्तों , गरीबी अपने सपने को पूरा करने में कभी बाधा नहीं बनती, जरूरत तो हौसला व लगातार परिश्रम की होनी चाहिए।

 

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