Acid Attack Survivor Laxmi Agarwal Biography Age, Boyfriend

Laxmi Agarwal Biography

Laxmi Agarwal Biography :- 

कहते हैं, इंसान के अंदर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो शायद समय और भाग्य भी अपना रुख बदल लेता है। और इस तथ्य को साबित कर दिखाया एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल ने। शायद लोगों का मानना होता है कि इस दुनिया में केवल खूबसूरत लोग ही पसंद किए जाते हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसी रियल लाइफ हीरो के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि एसिड अटैक सर्वाइवर हैं। और एसिड अटैक सर्वाइवर होने के बाद भी इस समाज में डटकर खड़ी रहीं। और उन्होंने एसिड अटैक से जुड़ी घटनाओं का खुलकर विरोध किया।

लक्ष्मी अग्रवाल ने इस समाज के सामने अपने विचारों आपबीती को प्रस्तुत किया। शायद यह घटना कहने और सुनने में साधारण लग सकती है लेकिन यह लक्ष्मी अग्रवाल के जीवन मे घटित घटना कोई साधारण घटना नहीं थी। 

लक्ष्मी अग्रवाल का प्रारंभिक जीवन ( Laxmi Agrwal Biography)

मिडिल क्लास फैमिली की एक लड़की इंडियन आइडियल में जाना चाहती थी। वह सिंगर बनना चाहती थी। हर लड़की की तरह लक्ष्मी अग्रवाल भी अपना एक सपना सजोई हुई थी। लेकिन उस लड़की को शायद यह नहीं मालूम था कि उसकी जीवन कुछ और ही रुख लेने वाली है। Laxmi Agarwal Biography

लक्ष्मी अग्रवाल का जन्म 1 जून 1990 में नई दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। सभी लड़कियों की भांति उनका भी सपना था कि वह एक सिंगर के रूप में कैरियर बनाएं। लेकिन 15 साल की उम्र में एक लड़के द्वारा एकतरफा प्यार ने उनकी जिंदगी बदल के रख दी। महज 15 साल की उम्र में लक्ष्मी अग्रवाल पर मनबढ़ लड़कों द्वारा एसिड अटैक किया गया, जिसकी कल्पना कभी सपने में भी नहीं किया जा सकता था। 

कब और कैसे हुआ एसिड अटैक How To Acid attack on Laxmi Agarwal, Biography

एसिड अटैक का घटना लक्ष्मी अग्रवाल के साथ 2005 में घटित हुआ था। उस समय वह क्लास 7 में पढ़ती थी। यह घटना कुछ इस प्रकार हुआ था 32 साल के एक आदमी द्वारा लक्ष्मी अग्रवाल से एकतरफा प्यार ने उस मनबढ़ व्यक्ति जिसका नाम नईम खान उर्फ गुड्डा था जो कि लक्ष्मी जी को स्कूल व बाजार आते – जाते हर समय उनके अनिच्छा के बावजूद भी उनका पीछा करता रहता था। व उनके सहेलियों के सामने बाल पकड़ खींचना और परेशान करता रहता था। Laxmi Agarwal Biography

एक बार उस व्यक्ति ने लक्ष्मी अग्रवाल से शादी के लिए प्रपोज किया लेकिन लक्ष्मी अग्रवाल की तरफ से उस प्रपोजल को नकार दिया गया। और 22 फरवरी 2005 को करीब 11:00 बजे लक्ष्मी जी दिल्ली के प्रसिद्ध बाजार खान मार्केट से बाजार कर वापस घर लौट रहीं थीं तभी घात लगाये उस व्यक्ति ने अपने छोटे भाई के गर्लफ्रेंड के साथ मिलकर लक्ष्मी अग्रवाल के चेहरे पर तेजाब फेंक दिया।

हाल ही में लक्ष्मी अग्रवाल ने एक शो में बयान दिया था कि – अटैक के दौरान उन्होंने अपनी आंखों को ढक लिया था जिससे आंखों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंच सका। लेकिन तेजाब फेंकने के दौरान ऐसा लगा मानो जैसा कि किसी ने मुझे जिंदा आग लगा दिया हो। मैं बहुत तड़प रही थी। उन्होंने बताया कि कुछ पलों में ही उनके चेहरे और कान के हिस्सों के मांस पिघल कर जमीन पर गिरने लगे और हड्डियों में भी जलन होने लगी।

साथ ही बताया कि 2 महीने से अधिक इस दुखदाई परिस्थिति से गुजरते हुए राम मनोहर अस्पताल में बिताया। एसिड अटैक से करीब 2 महीना अस्पताल में जूझने के बाद जब वह घर लौटीं तो घर के सभी आईने हटा दिए गए थे।

 

 

कैसा रहा वह परिस्थिति ( Laxmi Agarwal Biography)

लक्ष्मी जी ने बताया फिर भी जब मैंने अपने चेहरे को आईने में देखा तो मैं खुद बहुत डर गई और बहुत ही दुखी हुई। और यह सब देख कर मैंने ठान लिया की अब मेरे जीवन का कोई मतलब नहीं है। मैं अपने आप को खत्म कर लूंगी। लेकिन अपने माता-पिता के विषय में सोच कर आत्महत्या का विचार लाना बंद कर दिया।

लेकिन उन्होंने कहा की उस परिस्थिति में जीवन जीना इतना आसान भी नहीं था। वे बताती हैं कि जब मैं कहीं बाहर या फिर घर के छत पर हि टहलने निकलती थी तो लोग उनके चेहरे को देखकर अपने मुंह को फेर लेते थे। और दयनीय नजर से देख आगे बढ़ जाते थे। यहां तक कि कई लोगों ने उनको यह तक सलाह दे दी की अपने चेहरे को ढक कर रखा करो, नहीं तो आजू-बाजू के बच्चे तुम्हारे चेहरे को देखकर डर जाएंगे।

उन्होंने बताया कि इस समाज में उन्हें एक बार नहीं बल्कि अनेकों बार अपमान का सामना करना पड़ा था। और वे कहती हैं कि मैं उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहती हूं। जिन्होंने मुझे अपमानित किया। और बताती हैं कि लोगों द्वारा अपमानित होने एवं उनको घृणा से देखने जाने से ही उनके अंदर एक ऐसी ज़िद जागृत हुई जिससे उन्होंने कहा की अब तो कुछ इस दुनिया को करके ही दिखाना है।

घटना के बाद कैसे शुरू की अपनी कैरियर

ऐसी परिस्थिति से गुजरने के बाद लक्ष्मी जी ने एसिड अटैक के खिलाफ एक मुहिम चलाया। जिसको स्टॉप एसिड अटैक अभियान का नाम दिया। उनकी  संघर्ष और उनके द्वारा शुरू किया गया यह अभियान से दुनिया भर के लोग जागृत होने लगे। और एसिड अटैक के हमले से बचे हुए लोगों के लिए यह अभियान एक आवाज बन गई। 

इस मुहिम के शुरू होने का इतना गहरा असर हुआ कि खुलेआम एसिड के बिक्री पर अंकुश लग गई। और इतना ही नहीं एसिड अटैक सरवाइवर लोगों को सरकार द्वारा पुरस्कृत भी किया गया था। लक्ष्मी जी ने जून 2014 में न्यूज़ एक्सप्रेस के एक टेलीविजन शो में “उड़ान” नामक सीरियल की मेजबानी भी करते हुए नजर आईं थीं। 

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खुलेआम बिक रहे एसिड पर इनके मुहिम चलाने पर अंकुश लगाया गया और हजारों एसिड अटैक्स पीड़ित के लिए एक नई पहचान बंद कर सामने आईं। इसी जीजिविषा के चलते 2014 में मिशेल ओबामा ने लक्ष्मी को इंटरनेशनल ‘वूमेन ऑफ करेज अवार्ड’ से नवाजा था। और उसी वर्ष एनडीटीवी “इंडियन ऑफ द ईयर” भी बनीं। 

लक्ष्मी अग्रवाल के इस साहसिक कार्य ने समाज पर इतना सकारात्मक प्रभाव डाला की लक्ष्मी अग्रवाल इस समाज के लिए एक मिसाल बन कर खड़ी हो गई। और हाल ही में लक्ष्मी अग्रवाल के जीवन पर मेघना गुलजार की  फिल्म “छपाक” रिलीज हुई है, जिसमें लक्ष्मी अग्रवाल का मुख्य किरदार दीपिका पादुकोण निभा रहीं हैं। फिल्म में किरदार का नाम मालती है। फिल्म छपाक 10 जनवरी 2020 को रिलीज हो गई है। इस फिल्म में एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की कहानी बखूबी दिखाया गया है। 

ट्रेलर 

 

 

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