लालची सास, बुद्धिमान बहू Lalchi Saas Ki Kahani

Lalchi Saas Ki Kahani
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Lalchi Saas Ki Kahani – एक गांव में शंभू नाम का एक आदमी रहता था। उसकी बीवी गोमती और बेटी मधु बहुत अच्छे स्वभाव की थीं। शंभू बहुत अमीर आदमी था। वह अपनी बेटी से बहुत प्यार करता था। वह अपनी बेटी की सारी ख्वाहिशें पूरी करता था। कभी गोमती, मधु को घर के कामकाज करने को कहती तो शंभू उस पर बहुत ज्यादा गुस्सा होता था। 

ऐसे ही समय बीतता चला गया। एक दिन मधु के लिए एक रिश्ता आया। लड़के का नाम उमेश था वह पढ़ा लिखा था। और नौकरी की तलाश में था। यह सुनकर मधु के पिता ने कहा लड़के के पास अभी नौकरी नहीं है। मैं उसे अपने बेटी कैसे दे सकता हूँ। यह सुनकर उसकी बीवी गोमती ने समझाया कि लड़का पढ़ा लिखा है। नौकरी का क्या, नौकरी आज नहीं तो कल लग ही जाएगी। ऐसा रिश्ता बार-बार कहां मिलता है। मुझे लगता है कि मधु की शादी कर देनी चाहिए। मधु हमेशा खुश रहेगी।

बात समझने के बाद शंभू अपने बेटी मधु की शादी उमेश के साथ कर देता है। शादी के बाद कुछ दिनों तक मधु की सास उसे बहुत प्यार से रखती है। लेकिन कुछ समय बाद उसकी सास ने कहा की – अरे मधु तुम जाकर अपने पिताजी से कुछ पैसे क्यों नहीं लेकर आती। तुम्हारे पति को कोई नौकरी तो मिल नहीं रही है। तुम दोनों का खर्चा मैं अकेले कब तक चलाऊंगी।

यह बात मधु अपने पति उमेश को बताती है, लेकिन उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। और अंत में मधु अपने पिता के घर जाती है। यह देख शंभू और उसकी पत्नी बहुत खुश होते हैं। और मधु के आने का स्वागत करते हैं। मधु पैसे वाली बात अपने पिता से नहीं बताना चाहती है। लेकिन उसके अलावा कर भी क्या सकती। उसने अपने पिता से कहा कि – पिताजी मुझे कुछ पैसे की जरूरत है। उमेश की नौकरी लगते ही हम वापस कर देंगे।

यह सुन पिता ने बोला – बेटी इसमें इतनी घबराने की क्या बात है। तुम जाओ और अलमारी से जरूरत भर के पैसे निकाल लो। मधु पैसे लेकर वापस अपने ससुराल जाती है। पैसा देख उसके पति और सास बहुत ही खुश होते हैं। इसी प्रकार कुछ समय बीतने के बाद लाया गया पैसा खत्म हो गया। फिर उमेश मधु को कहता है कि मधु मुझे कुछ काम है, तुम जाकर अपने पिताजी से कुछ पैसे लेकर आओ। यह सुन मधु जाने से मना कर दिया। लेकिन पति और सास के दबाव बनाने से मधु दोबारा जाकर अपने पिता से पैसे लाती है।

इसी प्रकार बार-बार पैसे खत्म होते और बार-बार पति व सास मधु को उसके पिता के पास पैसे लेने के लिए मजबूर करते। यह देख मधु ने पति और सास को सबक सिखाने के लिए एक तरकीब सोची। उसने अगले दिन अपने पति उमेश से कहा कि हमारे पिताजी के व्यवसाय में घाटा होने के वजह से काफी दिक्कतें आई हैं। आपने जो पैसे खर्च के तौर पर लिए थे वह उन्हें वापस कर दीजिए। लाचार बूढ़ी दादी

यह सुन उसकी सास उस पर भड़क गई और कहने लगी। लाए गए पैसे तुम दोनों पति पत्नी पर ही तो खर्च हुए हैं। और भिनभिनाती हुई  बाहर की तरफ जाती है।  तभी अचानक उसका पैर फिसलता है। और पीठ के बल गिर जाती है। गिरने से उसके कमर में चोट लग जाती है, जिसके कारण डॉक्टर बेड रेस्ट करने के लिए कहता है।

अब उमेश के पास अपने मां का इलाज कराने के लिए भी पैसे नहीं थे। और शर्म के मारे मधु से भी कुछ नहीं कह सकता। मधु ने उमेश को समझाया कि अगर आपने मांग कर खाने की वजाय मेहनत मजदूरी करके कमाया होता, तो शायद मां की दवा कराने के लिए आपको सोचना नहीं पड़ता। यह सुन उमेश शर्म से झुक जाता है, और उसी समय नौकरी की तलाश में निकल जाता है।

इधर मधु की सास को अपनी गलती का एहसास होता है। और मधु से माफी मांगती है। शाम को उमेश मेहनत कर कुछ पैसे कमा कर लाता है,जिससे मां की दवा कराता है। अब इस प्रकार उमेश को मेहनत से कमा कर खाने का आनंद आता है। और धीरे-धीरे पैसे कमा कर मधु के पिताजी से लिए गए पैसे को वापस कर देता है। और मधु व अपने मां के साथ सुख व शांति से जीवन व्यतीत करता है। 

दोस्तों हमे इस कहानी से सिख मिलती है की हमे कभी भी दुसरो के धन पर लालच नहीं करना चाहिए और नाही दुसरो के धन सम्पदा पर निर्भर रहनी चाहिए।

 

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