कैफ़ी आज़मी की 101 वीं जन्मदिन पर सेलिब्रेट कर रहा Google

Kaifi Azmi

Kaifi Azmi Songs, Poetry,Poems, Quotes and Shayari –

Kaifi Azmi Biography – दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन में से एक गूगल ने डूडल बनाकर आज उर्दू के मशहूर शायर कैफी आजमी को याद किया है। गूगल कैफ़ी आज़मी की 101वीं जयंती को सेलिब्रेट कर रहा है।

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Google द्वारा कैफ़ी आज़मी की जयंती को सेलिब्रेट करने का अंदाज गूगल ने अपने डूडल में कैफ़ी आज़मी की तस्वीर लगाकर दिखाया है। इस तस्वीर में वे माइक पर कुछ बोलते हुए नजर आ रहे हैं।

आखिर कौन है कैफ़ी आज़मी (Kaifi Azmi Biography)

कैफ़ी आज़मी का जन्मदिन दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन गूगल इस प्रकार मना रहा है इसके पीछे क्या राज है। कौन है ये कैफ़ी आजमी, कैफी आज़मी उर्दू अदब की पहली श्रेणी के शायर हैं। जिन्होंने सिनेमा के लिए भी कई गीते लिखी है। कैफ़ी आजमी का जन्म 14 जनवरी 1919 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के छोटे से गाँव मिजवां में हुआ था। उनका असली नाम अख्तर हुसैन रिजवी था। 

आजमी जी केवल 11 साल की उम्र में ही अपनी पहली कविता गजल की शैली में लिखी। इसके बाद मुशायरा का दौर शुरू हुआ और वह जल्द ही देश के साथ-साथ विदेशों में भी प्रसिद्ध हो गये। कैफ़ी आज़मी के पिताजी जमीदार थे लेकिन कैफ़ी जी का मिजाज कुछ अलग ही था।

आजमी जी बचपन से ही समाज के हित के बारे में सोचने वाले व्यक्ति थे। जब वे केवल केवल 7 साल के थे तब ईद पर नए कपड़े इसलिए नहीं पहनते थे क्योंकि किसानों के बच्चों को नए कपड़े नहीं मिलते थे।

कैफ़ी आज़मी वर्ष 1936 में साम्यवादी विचारधारा से प्रभावित हुए और सदस्यता ग्रहण कर ली। धार्मिक रूढि़वादिता से परेशान कैफी को इस विचारधारा में जैसे सारी समस्याओं का हल मिल गया। उन्होंने निश्चय किया कि सामाजिक संदेश के लिए ही लेखनी का उपयोग करेंगे। और उन्होंने लेखनी को ही अपना पहचान बना लिया। 

आजमी जी सादगी भरा जीवन जीने वाले और हंसमुख स्वभाव के व्यक्ति थे। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने मुंबई में उर्दू जर्नल “मजदूर मोहल्ला” का संपादन किया और इसी दौरान उनकी मुलाकात शौकत से हुई।

कुछ दिनों तक शौकत जी के साथ रहने के बाद दोनों ने पूरी जिंदगी एक साथ रहने का फैसला किया और मई 1947 में शौकत से विवाह संपन्न किया। जिनसे उनके दो बच्चे शबाना और बाबा आजमी है। Laxmi Agrwal Biography

शबाना आजमी प्रसिद्ध हिंदी फिल्म अदाकारा है। कैफ़ी आज़मी सिर्फ अपनी गजलों तक ही सीमित नहीं थे। बल्कि अपनी जिंदगी में भी काफी प्रगतिशील थे। नज्म लिखने वाले इस शायर ने अमीरी- गरीबी के फासला को मिटाने की बात कि और समाज में पुरुष और महिलाओं दोनों को समान दर्जा देने की वकालत की। कैफ़ी आज़मी जी का निधन 10 मई 2002 को मुंबई में हुआ।  

शेरो शायरी के अलावा आजमी गीत और स्क्रीनप्ले (बॉलीवुड ) भी लिखने के लिए काफी मशहूर थे। साथ ही वे सामाजिक मुद्दों को लेकर भी मुखर होकर आवाज उठाते थे। कैफी आज़मी की लिखी ये गीत आज भी युवाओं में नया जोश भर देती है –

Kaifi Azmi Songs

कर चले हम फिदा जानो तन साथियो 

अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो। 

 

Kaifi Azmi Shayari

 

कैफ़ी आज़मी द्वारा लिखी कुछ शेर –

 

होंटों को सी के देखिए पछ्ताइएगा आप
हंगामे जाग उठते हैं अक्सर घुटन के बाद। 
इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं
दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बाद। 

की है कोई हसीन ख़ता हर ख़ता के साथ
थोड़ा सा प्यार भी मुझे दे दो सज़ा के साथ। 
गर डूबना ही अपना मुक़द्दर है तो सुनो
डूबेंगे हम ज़रूर मगर नाख़ुदा के साथ। 
ख़ार-ओ-ख़स तो उठें रास्ता तो चले
मैं अगर थक गया क़ाफ़िला तो चले।
बेलचे लाओ खोलो ज़मीं की तहें
मैं कहाँ दफ़्न हूँ कुछ पता तो चले। 

 

बस्ती में अपनी हिंदू- मुस्लमां जो बस गए
इंसां की शक्ल देखने को हम तरस गए।
कच्चे मकान चंद गिरे भी तो क्या हुआ
बादल बरसने आए थे आकर बरस गए। 

 

कहीं अँधेरे से मानूस हो न जाए अदब
चराग़ तेज़ हवा ने बुझाए हैं क्या क्या। 
जब उस ने हार के ख़ंजर ज़मीं पे फेंक दिया
तमाम ज़ख़्म-ए-जिगर मुस्कुराए हैं क्या क्या। 

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