Funny Story In Hindi मंगरुआ के संघर्ष भरी प्रेम कहानी

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Funny Story In Hindi –  यह कहानी उत्तर प्रदेश के पड़ोसी भाई बिहार के गोपालगंज जिले के मंगरुआ पुत्र मुन्नीलाल की है। कहानी कुछ इस प्रकार है मंगरुआ कम पढ़ा लिखा होने से पैदाइशी से ही गांव में ही रहा। गांव में रहकर गाय भैंस की चरवाही करता था। साथ में 7 बकरियां भी थी। मंगरुआ के पिता मुन्नीलाल बहुत ही चटपटे हाजमोला वाले मिजाज के थे।

मुन्नीलाल गाय भैंस बकरियों से ज्यादा मंगरुआ की पहरेदारी करते रहते थे। मुन्नी लाल की पत्नी झन्नों देवी, नाम के समान ही हमेशा झल्लाने वाली महिला थी। वह मंगरुआ पर कम मुन्नीलाल के सर पर हमेशा चढ़ी रहती थी। मुन्नीलाल मंगरुआ का सीधा पन देख बहुत ही चिंतित रहते थे। मंगरुआ का  इलाज कराने के लिए गांव के बगल के ही वैद्य पशुनाथ जोकि भेड़ बकरी के डॉक्टर थे। उनसे राय मशवरा लेने उनके पास पहुंचे।

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वैद्य पशुनाथ का सुझाव था कि ससुरा मंगरुआ के विवाह कर दिया जाए। का पता मेहरिया के आने के बाद उसमे कुछ सुधार हो जाए। मुन्नीलाल को यह बात कुछ हद तक सही लगा और मंगरुआ के लिए लड़की खोजना प्रारंभ कर दिये। लेकिन ई सब फैसला लेने से पहले मंगरुआ से भी मुन्नीलाल को कुछ जान लेना चाहिए था। क्योंकि भाई मंगरुआ के पास भी दिल और प्रबल इच्छा थी अच्छी मेहरिया पाने की। 

हुआ यूँ की जब मुन्नीलाल मंगरुआ को बुलाकर बोला- आज गाय भैंस बकरी चरावे मत जईहे। आज कुछ लोग तोहके देखे आवत बाड़े। मंगरुआ सर खुजाते हुए आश्चर्य से कहा ! देखें। हम ना दिखाएब। हमके बहुत शर्म आवेला।

मुन्नीलाल मंगरुआ को समझाते हुए आगे बढ़े की मंगरुआ की बात सुनने के बाद मुन्नीलाल मंगरुआ पर चप्पल जूता की बरसात करने लगे। मंगरुआ का कहना था कि “शादी करब त एके लड़की से और वो भी गुन्जवा से जूता चप्पल गिराते -गिराते मुन्नीलाल थक गया लेकिन मंगरुआ कहते नहीं थका की हमार मेहरिया गूंजा बनिहे।

मंगरुआ के माई गुंजा के विषय में मंगरुआ से उगलवाना शुरू किया तो पता चला गांव के दूसरे छोर के रामदास बनिया की बेटी थी। जो 11 बकरियों के टीम को लेकर रोज मंगरुआ के साथ गांव के बहरे वाले फील्ड में नैन मटक्का करती थी। बात जब आगे बढ़ा तो मुन्नीलाल शादी के लिए तैयार हो गया। लेकिन गुंजा के साथ 11 बकरियों को भी घर लाने के शर्त पर जो रामदास बनिया को कत्तई  मंजूर नहीं था।

मंगरुआ और गुन्जवा के विवाह का शर्त भारत-पाकिस्तान के समझौते के मुद्दे से भी बड़ा मुद्दा बन गया था। लेकिन मंगरुआ की इच्छा प्रबल थी विवाह होई त सिर्फ गुन्जवा से। मंगरुआ की विवाह के संघर्ष की गाथा का गुणगान पार्ट 2 में  किया जाना है। कृपया धैर्य बनाए रखें। Part 2

 

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